देने वाला पेड़
देने वाला पेड़
एक गाँव में एक छोटा लड़का था, जिसे एक बड़े पेड़ से बहुत लगाव था। वह रोज़ पेड़ के पास आता, उसकी शाखाओं पर झूलता, उसकी छाया में बैठता, और खूब खुश रहता।
जैसे-जैसे लड़का बड़ा हुआ, उसने पेड़ के पास आना बंद कर दिया। एक दिन वह वापस आया और बोला, "मुझे पैसे चाहिए।" पेड़ ने प्यार से कहा, "मेरे फल ले जाओ और बेच दो।" लड़के ने सारे फल ले लिए और चला गया।
कुछ सालों बाद वह फिर आया और बोला, "मुझे एक घर चाहिए।" पेड़ ने कहा, "मेरी शाखाएँ काट लो और अपना घर बना लो।" लड़के ने शाखाएँ काट लीं और चला गया।
फिर बहुत समय बाद, वह बूढ़ा होकर लौटा और बोला, "मुझे कहीं आराम करना है।" पेड़ ने कहा, "मेरी जड़ें ही बची हैं, आकर मुझ पर बैठ जाओ।"
बूढ़ा आदमी बैठ गया, और दोनों खुशी से रोने लगे।
नैतिक शिक्षा:
सच्चा प्यार बिना किसी स्वार्थ के सिर्फ देना जानता है।

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